पृष्ठ

सोमवार, 31 अगस्त 2009

दिल न लगावा यार..

दिल न लगईयो यार ॥
दिल न लगईयो यार ॥

दिल टूट जाता है॥

बड़ी तकलीफ होती है॥

जब बंधन छूट जाता है॥

नजरो में घूमती है॥

बीती हुयी कहानी॥

मुझपर गुजर रही है॥

बताता हूँ जो जुबानी॥

आँखों से आस्क गिर गिर॥

यूं सूख जाता है..

।बड़ी तकलीफ होती है॥

जब बंधन छूट जाता है॥

जुल्मी बना ज़माना॥

करता उसे हूँ याद॥

दर-दर भटक रहा हूँ॥

किस्से करू फरियाद॥

मौसम बना बेढंगा॥

जो रूठ जाता है...

बड़ी तकलीफ होती है॥

जब बंधन छूट जाता है॥

ख्वाबो में हमको कब तक॥

जगाती रहोगी तुम॥अपना शिकार हरदम ॥बनाती रहोगी तुम॥रोता हूँ छुप छुप कर॥जब यार दूर जाता है...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें