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रविवार, 7 जून 2015

आपन आपन हथकंडा ॥

 झंझट होए फिर चुनाव म ॥
चलिहय लाठी डंडा ॥
प्रत्याशी सारे अजमाईहै ॥
आपन आपन हथकंडा ॥
केहू छुप के दिय रुपैया ॥
केहू धौस देखाये ॥
केहू अपने रुतबा के संग ॥
आपन एहसान गिनाये ॥
केहू केहू पंडित पुजिहै ॥
केहू पूजे पंडा ॥
प्रत्याशी सारे अजमाईहै ॥
आपन आपन हथकंडा ॥
केहू कहे की जीत जाब तो ॥
बनवाउब तुम्हे कालोनी ॥
केहू कहे की हमें जितावा ॥
खोलब बैठ  तिजोरी ॥
बिना मतलब का बहुत प्रत्याशी ॥
देइहै सेंत  म चंदा ॥
प्रत्याशी सारे अजमाईहै ॥
आपन आपन हथकंडा ॥

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