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शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

आप से..

शरारत करना सीख गयी ॥
आँखे हमारी आप से॥
देख के क्यों मचल जाती॥
आँखे हमारी आप से॥
जब सोती है आँखे हमारी॥
सपनों में क्यों आते हो?
बाह पकड़ के आप मेरी॥
सोती रात जगाते हो॥
याहो के क्यों फूल खिलते॥
मुस्कुराती हूँ आप से॥
होठ भी हंसने लगे है॥
गालो पे लाली छा गई॥
तेरे नाम की मेहदी रच के॥
मै भी सज के आ गयी॥
पता नहीं क्यों फ़िदा हुआ है...
दिल हमारा आप पे॥

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