आंसूओ से गिरते गम को॥
दारू में पी रहा हूँ॥
उलझी पडी है जिंदगी॥
फिर भी मै जी रहा हूँ॥
दिन भी लगा चिढाने॥
रात तडपाती है॥
सूरज न हंसने देता॥
बीती बाते रुलाती है॥
कैसा तूफ़ान आया॥
जो घुट घुट के जी रहा हूँ॥
उलझी पडी है जिंदगी॥
फिर भी मै जी रहा हूँ॥
कोयल की बोली मुझको॥
कौआ सुनाता है॥
सूखा चमन पडा है॥
कुछ नजर नहीं आटा है,,,
अपने ही कर कर्मो पे॥
आंसू बहा रहा हूँ॥
उलझी पडी है जिंदगी॥
फिर भी मै जी रहा हूँ॥
घर के लोग पागल की...
उपमा तक दे डाली॥
मुझे देखते ही...
बंद करते है॥
किवाड़ी...
मैंने किया गलत था क्या॥
जो अब पछता रहा हूँ॥
उलझी पडी है जिंदगी॥
फिर भी मै जी रहा हूँ॥
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